Saturday, 17 March 2012


हमारे भूगोल के मास्टरजी ठीक थे कहते,
अरे जीते तो साले अँगरेज़ है,
हम हिन्दुस्तानी कहाँ जीते है जिन्दगी
 वो अँगरेज़ को देखो चड्डी पहन बीच पर नहाता
और हम अपना पिछवाड़ा उठाये रेल की पटरी पर
आती हुई मेल और एक्सप्रेस गिनते रहते,
हमारे भूगोल के मास्टरजी ठीक थे कहते,
अरे खाते तो साले अँगरेज़ है,
हम हिन्दुस्तानी कहाँ ढंग से खाते,
वो अँगरेज़ पौष्टिक और स्वाद के मेल बनाता,
और हम अपने नेताओं की नक़ल में सिर्फ
और सिर्फ गायों भैंसों का चारा खाते रहते
हमारे भूगोल के मास्टरजी ठीक थे कहते,
अरे मज़े तो साले अँगरेज़ है करते
हम हिन्दुस्तानी कहाँ मज़े है करते,
वो अँगरेज़ अपनी प्रेयेसी से सदा जी भरते,
और हम हिन्दुस्तानी सिर्फ मकान के कमरे
बस यौन में लगे हुए बच्चे पैदा करते रहते
हमारे भूगोल के मास्टरजी ठीक थे कहते,
अरे कानूनची तो वो अँगरेज़ है होते
हम हिन्दुस्तानी कहाँ कानून की करते
वो अँगरेज़ के यहाँ मर्डोक जैसे डरते रहते
और हमारे यहाँ माल्या कलमाड़ी और राजा जैसे,
जेल जाकर भी सरकारी ठाठ में पलते रहते
हमारे भूगोल के मास्टरजी ठीक थे कहते,
====मन वकील

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