Tuesday, 10 April 2012

भारत जैसे देश में,चहुओर गिद्ध रहे मंडराए,
अफज़ल गुरु के हित में, संसद दियो रूलाय,
मुंबई नरसंहारी को वीर सुशोभित करवाये,
नित निरामिष भोज पकवान वाको खिलाय,
ढोंग करे न्याय को,सलमान खुर्शीद दियो रूलाय,
दिग्विनय भी अब आतंकियों के घर में खाय,
१९८४ के दंगों के दोषी जेड सुरक्षा से भरमाय,
कश्मीर से पलायित को सबरौ दियो भुलाय,
जरदारी के आगे,दियो निजदेश सबहु बिछाय,
जो बात करे कोहु भारत की,श्री राम की इहा,
साम्प्रदायिक वो जन, उद्ध्घोषित हो जाए,
अब प्रज्ञा या पुरोहित को कहाँ मिले न्याय,
जो धन आतंकियों के उत्थान में बँट जाय .......
 

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