" उत्तर भारतीय दिल्ली निवासियों द्वारा अपने पूर्वोत्तर भारतीय बेटे की निर्मम हत्या पर आक्रोश सहित "
मुझे मेरा बेटा अब वापिस लौटा दो,
ए दिल्ली मुझे भी अब यहाँ जगह दो,
नहीं मैं कोई विदेशी, हूँ खालिस देसी,
उत्तर पूरब का हूँ , तेरा जैसा हूँ देसी,
मेरे नाम से चीनी चिंकी यूँ मिटा दो
मुझे मेरा बेटा अब वापिस लौटा दो,
ए दिल्ली मुझे भी अब यहाँ जगह दो,
यदि नहीं दे सकते मेरे बच्चों को जो तुम घर,
क्यों डालते मेरी बेटी पर तुम वो बुरी सी नज़र,
क्या अभी तक है तुममे वो गुलामी का असर,
मुझे भी वो सम्मान मेरा हक़ यहाँ पर दिला दो
मुझे मेरा बेटा अब वापिस लौटा दो,
ए दिल्ली मुझे भी अब यहाँ जगह दो,
घर से दूर भेजा था मैंने उसे यहाँ पढ़ने संवरने,
कुछ सपने थे देखे जिनमे रंग अभी मुझे थे भरने,
उपहास या परिहास की वस्तु नहीं भेजी मैंने मरने,
मेरा अंश था वो मेरे जिगर का टुकड़ा लौटा दो
मुझे मेरा बेटा अब वापिस लौटा दो,
ए दिल्ली मुझे भी अब यहाँ जगह दो,
मुझे मेरा बेटा अब वापिस लौटा दो,
ए दिल्ली मुझे भी अब यहाँ जगह दो,
नहीं मैं कोई विदेशी, हूँ खालिस देसी,
उत्तर पूरब का हूँ , तेरा जैसा हूँ देसी,
मेरे नाम से चीनी चिंकी यूँ मिटा दो
मुझे मेरा बेटा अब वापिस लौटा दो,
ए दिल्ली मुझे भी अब यहाँ जगह दो,
यदि नहीं दे सकते मेरे बच्चों को जो तुम घर,
क्यों डालते मेरी बेटी पर तुम वो बुरी सी नज़र,
क्या अभी तक है तुममे वो गुलामी का असर,
मुझे भी वो सम्मान मेरा हक़ यहाँ पर दिला दो
मुझे मेरा बेटा अब वापिस लौटा दो,
ए दिल्ली मुझे भी अब यहाँ जगह दो,
घर से दूर भेजा था मैंने उसे यहाँ पढ़ने संवरने,
कुछ सपने थे देखे जिनमे रंग अभी मुझे थे भरने,
उपहास या परिहास की वस्तु नहीं भेजी मैंने मरने,
मेरा अंश था वो मेरे जिगर का टुकड़ा लौटा दो
मुझे मेरा बेटा अब वापिस लौटा दो,
ए दिल्ली मुझे भी अब यहाँ जगह दो,
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