मन-वकील के मन की आवाज़
Tuesday, 5 July 2011
इस शहर की रातों में अन्धेरें में, अब उल्लू से भी उड़ते है ,
कुछ अनजान बने रहते है, कुछ बस अपनों से लड़ते है....
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment