Monday, 11 July 2011

कुछ पल में गुजर जायेगी , ना जाने कैसे ये जिंदगानी,
कुछ ख्वाब अधूरे होंगे, कुछ रह जायेगी अधूरी कहानी////
चंद साँसे जो चलती है अब भी मेरे सीने में धीरे अदनानी,
दूर जायेंगी वो भी एक दिन, छोड़ इस बदन की बहती रवानी///
कहीं दूर बसेरा हो शायद, रूहे-खाक का, ना जाने कहाँ ऐ-दिल,
बस देखते रह जायेंगे यार दोस्त, भर भर अपनी आँखों में पानी... ......
=====मन वकील

1 comment:

  1. Bhai Sahab apne to abhi se ankho me pani la diya........

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