वो जो पेश करते है , अक्सर,
मेरे गीतों को अपने नाम देकर,
वो मेरे दोस्त थे साथ थे अकसर,
अब मुझे बेचते है इलज़ाम देकर.....
वो सिखाते रहे पल पल अक्सर,
चलाकियाँ,ज़माने का नाम लेकर,
अब तो सामने भौंकते,वो अक्सर,
वो जो हमारे पाले थे, रह रहकर,
मन-वकील, अब तो होता ये अक्सर,
आस्तीन में सांप से निकलते रहबर....
मेरे गीतों को अपने नाम देकर,
वो मेरे दोस्त थे साथ थे अकसर,
अब मुझे बेचते है इलज़ाम देकर.....
वो सिखाते रहे पल पल अक्सर,
चलाकियाँ,ज़माने का नाम लेकर,
अब तो सामने भौंकते,वो अक्सर,
वो जो हमारे पाले थे, रह रहकर,
मन-वकील, अब तो होता ये अक्सर,
आस्तीन में सांप से निकलते रहबर....
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