Monday, 12 November 2012

   चमकते हुए सितारों की वो भरी थाली, 
    आज घर की मुंडेर पर मैंने है सजाई,
    तमस को मिटा कर प्रकाशित कर,
    मेरे घर वो दमकती दिवाली है आई,
    कभी छत से उड़ते रौशनी के राकेट,
    सड़क पर वो पटाखों के लड़ी है जलाई,
    सजी हुई दुकानों से बाज़ार की रौनक,
    चेहरों पर ख़ुशी लेकर वो भीड़ है आई,
    चमकते हुए सितारों की वो भरी थाली, 
     आज घर की मुंडेर पर मैंने है सजाई,
     कहाँ वो अमावस अब है ना रात सूनी,
     आतिशबाज़ियो का शोर देता है सुनाई,
     मेहमानों का वो यूँ आना नहीं है बोझ,
     आये वो संग मुस्कराहट के बँटे है मिठाई,
    नए पहनावों से अब नयी शान है दिखती,
    क्या बालक क्या बूढ़ा सभी नये लगे है भाई
    चमकते हुए सितारों की वो भरी थाली, 
     आज घर की मुंडेर पर मैंने है सजाई,
====मन वकील





   

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