कौन है बुद्दिजीवी
बचपन से एक ही सवाल बार बार,
कुरेदता रहता मेरे मन में हर बार,
क्या होता है वो शख्स "बुद्धिजीवी"
कैसा दिखता होगा वो " बुद्धिजीवी "
क्या उसके सिर पर होगा कोई गुमड,
या माथे पर रेखायें होंगी उमड़ उमड़,
क्या वो बुद्दि के संग होता होगा मस्त,
या उसकी भयंकर बातें करती "पस्त",
शायद दो सींग होंगे उसके सिर पर,
क्योकि गदर्भ सा नहीं होगा वो ऊपर,
खोजता रहा मन वकील बस यहाँ वहां,
जब बड़ा हुआ तो मिले अनेको हर जगह,
व्यर्थ में अर्थ निकालते,बेअर्थ हो जीते,
कभी मीनमेख निकाल,औरों के फटे सीते,
कहीं भी कोई पत्थर उठाओ,निकले ये परजीवी,
मन वकील मुर्ख भला, जो नहीं है वो बुद्धिजीवी।।।।
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