चारों ओर है हाहाकार, यहाँ अब हर शख्स रोता है,
फैली है बेरोज़गारी, पढ़ा- लिखा नौजवान रोता है,
बैठे है पर फैलाएं यहाँ, चहु ओर गिध्दों के झुण्ड,
धरा बंजर हो गयी है, और सूख गए जल के कुण्ड,
हवाओं में भी है जहर,प्रांतीयता और क्षेत्रवाद से भरा,
अपराध अब संसद में पलता है, चाहे छोटा या बड़ा,
बनकर हमारे खुदा, वो अब हमें ही को लुटते हर-पल,
भरे है अब बाहुबली सरीखे नेता, चाहे कैसा भी हो दल,
भ्रष्टाचार की चादर, अब हर सरकारी बाबू तान कर सोता,
बंगले है कारें है, चाहे इस देश का जन-मानस भूख से रोता,
सिक्का हो कैसा भी, बस सरकारी लोगों का ही है चलता,
संसद या न्याय-पालिका,सभी जगह इनका ही जोर है चलता,
किसें है खबर, अब कहाँ हमारी आजादी है अब खोयी ?
कौन जानता है किसकी आँखें उसे ढूंढ़ते हुए है कितनी रोई?
भुला बैठे है अब हम अपनी भारतीयता की एक वो पहचान,
जिन्होंने दी शहादत इसके लिए भुला दी उनकी भी पहचान,
अब तो इंतज़ार है,कब चलेगी इस मुल्क में बदलाव की आंधी,
जागो ऐ मेरे यारों, बनके अब अन्ना हजारे और महात्मा गाँधी ........
==मन-वकील
फैली है बेरोज़गारी, पढ़ा- लिखा नौजवान रोता है,
बैठे है पर फैलाएं यहाँ, चहु ओर गिध्दों के झुण्ड,
धरा बंजर हो गयी है, और सूख गए जल के कुण्ड,
हवाओं में भी है जहर,प्रांतीयता और क्षेत्रवाद से भरा,
अपराध अब संसद में पलता है, चाहे छोटा या बड़ा,
बनकर हमारे खुदा, वो अब हमें ही को लुटते हर-पल,
भरे है अब बाहुबली सरीखे नेता, चाहे कैसा भी हो दल,
भ्रष्टाचार की चादर, अब हर सरकारी बाबू तान कर सोता,
बंगले है कारें है, चाहे इस देश का जन-मानस भूख से रोता,
सिक्का हो कैसा भी, बस सरकारी लोगों का ही है चलता,
संसद या न्याय-पालिका,सभी जगह इनका ही जोर है चलता,
किसें है खबर, अब कहाँ हमारी आजादी है अब खोयी ?
कौन जानता है किसकी आँखें उसे ढूंढ़ते हुए है कितनी रोई?
भुला बैठे है अब हम अपनी भारतीयता की एक वो पहचान,
जिन्होंने दी शहादत इसके लिए भुला दी उनकी भी पहचान,
अब तो इंतज़ार है,कब चलेगी इस मुल्क में बदलाव की आंधी,
जागो ऐ मेरे यारों, बनके अब अन्ना हजारे और महात्मा गाँधी ........
==मन-वकील
No comments:
Post a Comment