वो लोग कहते है कि प्रेम होता है वासना से परे,
हमने देखा है प्रेम को वासना के सहारे यूँ खड़े,
मिलता नहीं इस दुनिया में कहीं भी ऐसा प्यार ,
तन के मिलन से बनते देखी रिश्तो की मीनार,
निश्चल प्रेम सिर्फ किताबों में लिखी हुई कहानी,
काम क्रीड़ा के बिना कहाँ राजा कहाँ होगी रानी,
तन की ज्वाला बुझे,तो प्रेयसी निहारती है राह,
वरना कैसा इंतज़ार पिया का, और कैसी चाह,
क्यों बोले झूठ मन वकील,कहाँ मिलता ऐसा प्रेम,
यहाँ औरत मर्द के रिश्तों में होए सेक्स बड़ा नेम ...
...............मन वकील
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