मैं ना सच्चा हूँ ना कभी रहा मैं झूठा,
तुझको चाहा, इसी बात पर तूने लूटा,
मेरी वफाओं को समझा क्यों तमाशा,
बेहिसाब मुहब्बत थी तुझसे बेतहाशा,
हम चले उस राह पे,जहाँ से तुम गुजरे,
दिल में बसाये थे पर चुराते तुम नजरें,
प्यार जो था मुझसे, फिर क्यूँ दिल टूटा,
तुझको चाहा, इसी बात पर तूने लूटा,
तेरे चेहरे पर रही बसती सिर्फ रुसवाई,
हम रहे संग तेरे हमेशा यूँ बन परछाई,
हमको हर महफ़िल भी लगी यूँ तन्हाई,
जरा कही कदम ठहरे,तेरी याद चली आई,
आँखों के दरिया से,आँसुओं का सैलाब फूटा,
तुझको चाहा, इसी बात पर तूने लूटा।।।
==मन वकील
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