इस वक्त की है अज़ब दास्ताँ,
ढूंढे नहीं मिलता कही आशियाँ,
रातों को चिरागों से रौशनी नहीं,
आंधियों का अब जोर चलता यहाँ,
फितरत ही बदलती,सभी और यूँ ,
गुनाहों का दौर अब चलता यहाँ,
दोस्ती नहीं,मिले तिजारती अक्स,
कीमत से मिलता प्यार हर जगह.....
==मन-वकील
ढूंढे नहीं मिलता कही आशियाँ,
रातों को चिरागों से रौशनी नहीं,
आंधियों का अब जोर चलता यहाँ,
फितरत ही बदलती,सभी और यूँ ,
गुनाहों का दौर अब चलता यहाँ,
दोस्ती नहीं,मिले तिजारती अक्स,
कीमत से मिलता प्यार हर जगह.....
==मन-वकील
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