कुछ तस्वीरें आज भी है मेरे जेहन में,
जो कौंधती रहती है एक चमक के जैसे,
अब रुकता नहीं सिलसिला उन यादों का,
रह रह कर घटा सी गरजती हो कही जैसे,
यह समय की आंधी शायद सब कुछ उड़ादे,
पर साफ़ करेगी मन की धूल-परतों को, कैसे,
औंधे मुहँ रोने से भी नहीं छुपती यह आवाज,
चीखता जो है अब मेरा दिल,बार बार जो ऐसे,
अरे बदलते मौसम के संग अब तपिश भी गई,
जो कभी समेटे थी कभी उनको मेरे भीतर जैसे,
अब धुआं उठता रहता है बस एक लकीर बनके,
जहाँ जलते थे हमारे प्यार का अलाव से कैसे,
उठ मन-वकील ठिकाना ना बना, अब अपना
हर जगह,जब जिन्दगी हो इक सफ़र के जैसे....
==मन-वकील
जो कौंधती रहती है एक चमक के जैसे,
अब रुकता नहीं सिलसिला उन यादों का,
रह रह कर घटा सी गरजती हो कही जैसे,
यह समय की आंधी शायद सब कुछ उड़ादे,
पर साफ़ करेगी मन की धूल-परतों को, कैसे,
औंधे मुहँ रोने से भी नहीं छुपती यह आवाज,
चीखता जो है अब मेरा दिल,बार बार जो ऐसे,
अरे बदलते मौसम के संग अब तपिश भी गई,
जो कभी समेटे थी कभी उनको मेरे भीतर जैसे,
अब धुआं उठता रहता है बस एक लकीर बनके,
जहाँ जलते थे हमारे प्यार का अलाव से कैसे,
उठ मन-वकील ठिकाना ना बना, अब अपना
हर जगह,जब जिन्दगी हो इक सफ़र के जैसे....
==मन-वकील
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