उसके जिस्म की आंच आने लगती है
जब भी वो बैठती है आकर संग मेरे,
खुशबू उसकी मुझे बहकाने लगती है
जब सिमट जाती है ऐसे पहलु में मेरे,
उसके बालों से उठती वो भीनी सी महक,
मैं भूल जाता जब लग जाती गले मेरे,
उसके होंठो पे आज भी है मेरे चूमने के निशां,
आज भी बसती है छुप के इस दिल में मेरे.....
==मन-वकील
जब भी वो बैठती है आकर संग मेरे,
खुशबू उसकी मुझे बहकाने लगती है
जब सिमट जाती है ऐसे पहलु में मेरे,
उसके बालों से उठती वो भीनी सी महक,
मैं भूल जाता जब लग जाती गले मेरे,
उसके होंठो पे आज भी है मेरे चूमने के निशां,
आज भी बसती है छुप के इस दिल में मेरे.....
==मन-वकील
No comments:
Post a Comment