कहाँ रहे अब ये सीरियल पहले जैसे खूबसूरत,
कहाँ रही उनमे वो पहले जैसी वो निराली बात,
अब वही त्रिकोण प्रेम कहानी में नाचती बारात ,
वही साजिशें वही नफरतों के उमड़े से जज्बात,
वही प्रेमिका का उघडा बदन, नशीली होती रात,
रुकी सी कहानी, कछुए सी चलती बेवजह बेबात,
कभी हीरो मर कर जी उठे, दिखाए अपनी जात,
कभी हीरोइन आदर्श में लिपटी, देती सीता को मात ....
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