धमक धमक धरा धमक, निरत करत शिव प्रचंडतम,
केश उड़त नभ गति,ललाट पहु स्वेद रिसत अखंडतम,
मृदंग बजत बहुताल,चरण धरे मुद्रा असंख्य सुशोभितम,
वृषभराज होत मंत्र मुग्ध, बहे दौ नेत्र अश्रु रूप अनंततम,
जटा परिवर्तिता वेग रूपा,भागीरथी लियो रूप विशालतम,
शंशांक भवत असहज बाल,अलौकिक शिव गति अंतर्तम,
त्रिलोकपति नेत्र रक्तवर्ण होत,रुद्राक्ष मंडित भूलोक गर्जन्तम,
नमन करत सर्व देव,मानव असुर, वन्दित शिव चर्चितम,
मनोहरी छटा अवतरित,अर्चना करे विश्व महादेव उत्तमतम ..........
==मन वकील की ओर से शिव रात्रि महा-पर्व की शुभकामनाएं
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