खट्टी मीठी नोकझोंक, करे प्रेम गाढ़ा,
पिया बने कम्बल, आये जब भी जाड़ा,
आये ज्यो जाड़ा, पिया करते मनुहार,
ग्रीष्म आये चाहे,घटे ना घट घट प्यार,
बूंद बूंद बरसे सावन,प्रेम पिया बरसाय,
ऋतु चाहे परिवर्तित,मोह बढ़ता ही जाय,
मोह बढ़ता जैसे,पिया दिखलाय अनुराग,
प्रेयसी सह पिया गंधर्व सो गावे प्रेम राग,
No comments:
Post a Comment