रब ने अनोखी सी इक चीज़ मेरी तकदीर बनाई,
शक्ल पे तो लिखी अमीरी, जेब यूँ फ़क़ीर बनाई,
लुटाता रहा दौलत यूँ मैं मोहब्बत की बेपरवाह हो,
अपने खुद के हिस्से में बस रखी हमेशा वो तन्हाई,
कोई आकर कहता जो कभी,तुम हो मेरे मन वकील,
मैं दीवाना हो नाचता फिरता, तमाशा बन जगहँसाई,
टूटता फिर जो भरम,पैरों तले खिसक जाए वो जमीं,
कुछ देर ठहर खुद में, टटोलता फिरता तेरी परछाई,
रब ने अनोखी सी इक चीज़ मेरी तकदीर बनाई,
== मन वकील
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