उन रंग बिरंगे धागों ने जब मेरी कलाई को है थामा,
स्नेह मिला भावों से,मन ने पहना दायित्व का जामा,
माथे पर सिंदूरी तिलक,अक्षत के संग पहचान बना,
उसके ससुराल जाने पर था,वो दुःख अब अन्जान बना,
मुहं में रखी मिठाई से भी मीठे लगे,वो बहना के बोल,
"राखी" के बंधन ऐसे बंधे,रिश्तें भाई बहन के है अनमोल ....................
स्नेह मिला भावों से,मन ने पहना दायित्व का जामा,
माथे पर सिंदूरी तिलक,अक्षत के संग पहचान बना,
उसके ससुराल जाने पर था,वो दुःख अब अन्जान बना,
मुहं में रखी मिठाई से भी मीठे लगे,वो बहना के बोल,
"राखी" के बंधन ऐसे बंधे,रिश्तें भाई बहन के है अनमोल ....................
No comments:
Post a Comment