शब्दों से परे वो अद्बुद्ध छवि धरे वो,
पीताम्बर नीलाम्बर आभा धरे वो,
मुग्ध करता वो श्याम सलोना रूप,
रास लीला करत तब नृत करे भूप,
माखन खाए,कहलाय मदनगोपाल,
गोपी संग रास राचावे मेरे नंदलाल,
वृन्दावन के दुलारे है कृष्ण गोपाल,
देविकी के जाय,जसोदा के वो लाल,
नैनों में बसे ज्यो ही वाको मैं निहारूं,
दूर जाय कभी तो पल पल मैं पुकारूं,
कर्मयोगी वो प्रभु सोलह कला ज्ञाता,
गीता रचियता है वो बलदाऊं के भ्राता,
रंग बसे बने नवरंग,ऐसो मेरो कन्हाई,
राधाप्रिये,रुक्मणी देयो पिया की दुहाई,
करुणानिधान,कंसहन्ता वो जगदीश,
नमन करूँ पुनि पुनि, ऐसो है वो ईश,
शुभ वेला में गोपियाँ गावत रही बधाई,
नाचो गाओ पावन कृष्ण जन्माष्टमी आई
===मन वकील
पीताम्बर नीलाम्बर आभा धरे वो,
मुग्ध करता वो श्याम सलोना रूप,
रास लीला करत तब नृत करे भूप,
माखन खाए,कहलाय मदनगोपाल,
गोपी संग रास राचावे मेरे नंदलाल,
वृन्दावन के दुलारे है कृष्ण गोपाल,
देविकी के जाय,जसोदा के वो लाल,
नैनों में बसे ज्यो ही वाको मैं निहारूं,
दूर जाय कभी तो पल पल मैं पुकारूं,
कर्मयोगी वो प्रभु सोलह कला ज्ञाता,
गीता रचियता है वो बलदाऊं के भ्राता,
रंग बसे बने नवरंग,ऐसो मेरो कन्हाई,
राधाप्रिये,रुक्मणी देयो पिया की दुहाई,
करुणानिधान,कंसहन्ता वो जगदीश,
नमन करूँ पुनि पुनि, ऐसो है वो ईश,
शुभ वेला में गोपियाँ गावत रही बधाई,
नाचो गाओ पावन कृष्ण जन्माष्टमी आई
===मन वकील
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