Wednesday, 15 August 2012

उठो मन मोहन, जो सूरज चढ़ आया नभ पर,
कैसो चहल पहल है छाई अब इस धरती पर,
सोये पंछी अब लौटे, हमरे आँगन करे पुकार,
बछिया नाच नाच है रंभाती,गैय्या रही निहार,
जागे सरोवर और नदिया,खेत जोहे है किसान,
धरा मृदल होय रही,हर्षित होय खेत खलिहान,
माखन बिलोय रही गोपियाँ, सुर निकले सरसर,
उठो मन मोहन, जो सूरज चढ़ आया नभ पर,
श्याम सांवरे सबहु अपनों प्यारो मुख दिखलायो,
मोर मुकुट शीश धर,मधुर बांसुरी तान सुनाओ,
द्वार पर अब खड़े ग्वाल, करत रहे एको पुकार,
दरश दियो हमरे कृष्ण गोपाल,प्यारे नन्द कुमार,
जमुना देखे प्रतीक्षा,तीरे बट झुक करत समर,     
उठो मन मोहन, जो सूरज चढ़ आया नभ पर,
==मन वकील

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