अरे देखो सीबीआई,भाई सीबीआई,
कैसी सरकारी जांच एजेंसी है भाई,
कामनवेल्थ खेलो में हुई लूट खसोट,
मंत्री से लेकर संत्री तक बनाये नोट,
हर महकमे के अफसर हुआ निहाल,
जनता को किया, महंगाई से बेहाल,
अरे पेड़ काटे,दिल्ली में जंगल कांटे,
मंत्रिओं और बाबुओ में लेपटोप बांटे,
७८,००० करोड़ की खाई सबने मलाई,
पर किसी मंत्री को आंच तक न आई,
कैसी सरकार ने निराली प्रथा चलाई,
अरे देखो सीबीआई,भाई सीबीआई,
कैसी सरकारी जांच एजेंसी है भाई,
हुआ जमकर सरकारी खेल घोटाला,
भारत की हुई थू थू ,संग मुहँ काला,
जब केग रिपोर्टों ने खोली सब पोल,
मीडिया ने भी पीटा रोज़ इनका ढोल,
सरकारी लीपापोती का रचा प्रपंच,
कोर्ट लगने लगी थी नाटक का मंच,
पहले किये छुटभैय्ये बाबू गिरफ्तार,
शोर मचाये जनता, तो हिली सरकार,
फिर मिलकर ऐसी सरकारी स्कीम बनाई,
जनता का मुहँ बंद,अनोखी सी जांच बिठाई,
अरे देखो सीबीआई,भाई सीबीआई,
कैसी सरकारी जांच एजेंसी है भाई,
कलमाड़ी पकड़ा,भेजा उसे तिहाड़ जेल,
सरकार ने खुलकर खेला,मक्कारी का खेल,
अरे जेल कहाँ थी, कलमाड़ी को आराम था,
जेलर के कमरे से कमेटी चलाना ही काम था,
कलमाड़ी साब ने छ: महीने खूब किये मजे,
तिहार में अब उठते थे रोज़ सोकर वो ९ बजे,
मिली जमानत फिर, सरकारी जुगत भिड़ाई,
चार्ज शीट से नाम हटा,है जो सरकार अपनी भाई,
अरे देखो सीबीआई,भाई सीबीआई,
कैसी सरकारी जांच एजेंसी है भाई,
=========मन वकील
कैसी सरकारी जांच एजेंसी है भाई,
कामनवेल्थ खेलो में हुई लूट खसोट,
मंत्री से लेकर संत्री तक बनाये नोट,
हर महकमे के अफसर हुआ निहाल,
जनता को किया, महंगाई से बेहाल,
अरे पेड़ काटे,दिल्ली में जंगल कांटे,
मंत्रिओं और बाबुओ में लेपटोप बांटे,
७८,००० करोड़ की खाई सबने मलाई,
पर किसी मंत्री को आंच तक न आई,
कैसी सरकार ने निराली प्रथा चलाई,
अरे देखो सीबीआई,भाई सीबीआई,
कैसी सरकारी जांच एजेंसी है भाई,
हुआ जमकर सरकारी खेल घोटाला,
भारत की हुई थू थू ,संग मुहँ काला,
जब केग रिपोर्टों ने खोली सब पोल,
मीडिया ने भी पीटा रोज़ इनका ढोल,
सरकारी लीपापोती का रचा प्रपंच,
कोर्ट लगने लगी थी नाटक का मंच,
पहले किये छुटभैय्ये बाबू गिरफ्तार,
शोर मचाये जनता, तो हिली सरकार,
फिर मिलकर ऐसी सरकारी स्कीम बनाई,
जनता का मुहँ बंद,अनोखी सी जांच बिठाई,
अरे देखो सीबीआई,भाई सीबीआई,
कैसी सरकारी जांच एजेंसी है भाई,
कलमाड़ी पकड़ा,भेजा उसे तिहाड़ जेल,
सरकार ने खुलकर खेला,मक्कारी का खेल,
अरे जेल कहाँ थी, कलमाड़ी को आराम था,
जेलर के कमरे से कमेटी चलाना ही काम था,
कलमाड़ी साब ने छ: महीने खूब किये मजे,
तिहार में अब उठते थे रोज़ सोकर वो ९ बजे,
मिली जमानत फिर, सरकारी जुगत भिड़ाई,
चार्ज शीट से नाम हटा,है जो सरकार अपनी भाई,
अरे देखो सीबीआई,भाई सीबीआई,
कैसी सरकारी जांच एजेंसी है भाई,
=========मन वकील
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