Thursday, 6 December 2012



         जब थी मेरे गुड्डे गुडिया से खेलने की उम्र,
        तब माँ बापू तुमने क्यो मेरा ब्याह रचाया?
       क्यों अपनी जिद को समाजिकता मान कर,
       मुझे गुड्डे गुडिया सा बना मेरा लगन जुटाया,
       ऐसी बापू , बतलाओ तुमे क्या थी मजबूरी?
      क्यों ना मानते तुम, मेरी शिक्षा भी थी जरुरी,
      माँ, तुम ही बतलाओ मुझे क्यों ऐसे है रुलाया?
       जब थी मेरे गुड्डे गुडिया से खेलने की उम्र,
        तब माँ बापू तुमने क्यो मेरा ब्याह रचाया?
      क्या घर में मेरे लिए ना था आँगन वो औसरा,
      क्यों मुझे तुमने कोख में अपनी ऐसे था धरा,
      बापू ,क्यों मुझ अबोध से तुम्हे प्रेम लाड नहीं,
     क्यों माँ, तुम भी मानो बापू की हर बात सही,
    बतलाओ बापू, क्यों मुझसे मेरा बचपन है छुड़ाया,
            जब थी मेरे गुड्डे गुडिया से खेलने की उम्र,
        तब माँ बापू तुमने क्यो मेरा ब्याह रचाया? 
===मन वकील 

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