मित्रों, मेरे भारत में कब वो अलबेला सा सत युग आएगा,
बेईमानों को सज़ा हो, बलात्कारियों का वध किया जाएगा,
कब मेरे देश की बेटी शाम ढले सुरक्षित वापिस आएगी?
कब मेरे मन में से हर शंका निर्मूल होकर मिट जायेगी?
अरे, कब मेरे भारत में इन्साफ का तिरंगा ऐसे लहराएगा ?
कब कोई नपुंसक देश में कन्या भ्रूण हत्या नहीं करवाएगा?
कोई तो कह दो, कब कल्कि अवतरित हो मुक्ति दिलवाएगा,
मित्रों, मेरे भारत में कब वो अलबेला सा सत युग आएगा,
बेईमानों को सज़ा हो, बलात्कारियों का वध किया जाएगा,
कब मेरे देश में नेता नहीं बन पायेंगे, गुंडे चोर, बलात्कारी और डकैत,
कब निर्भीक हो वोट डालने जायेगी जनता, और पीटेंगे नेता के लठैत,
कब सच्चे मार्गदर्शक होंगे? कौन बतलायेगा हम सभ्यता का खोया पता,
देश में बढी महंगाई, सब्जी दाल चीनी और अनाज सभी कुछ हुआ लापता,
कब कोई लेगा जनता की सुध, भ्रष्टाचार को देश की जड़ों से निकाल पायेगा
मित्रों, मेरे भारत में कब वो अलबेला सा सत युग आएगा,
बेईमानों को सज़ा हो, बलात्कारियों का वध किया जाएगा,
============मन वकील
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