प्रिये मित्रों ...आज कई दिनों बाद वापिस दिल्ली लौटा हूँ ,,पुरे परिवार के साथ शिमला गया हुआ था...मन काफी प्रसन्न है...माता पिता साथ गए थे...मित्रों माँ बाप के मरने के बाद उनके श्राद पर पैसे खर्चने से बेहतर है की उनके जीते जी उन पर खर्च किये जाए और उन्हें कुछ पल की ख़ुशी दी जाये....माँ बाप के चेहरे की ख़ुशी कुछ पल में पूरा जीवन सफल हो जाता है...वो मन की संतुष्टि ही कुछ और तरह से मन को आनंदित करती है.....सच में एक मेडल जितने से अधिक ख़ुशी होती है......आपका मन-वकील
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