यारों जुबाँ खोल कर ज़रा देखा, तो फितरत सामने आ गई,
उनके चेहरे की रंगत बदली अचानक, नफरत सामने आ गई,
बस खामोश रहकर सब देखते रहे, जब हम दुनिया की रंगत,
सजने लगी फिर यारों की महफ़िल,चाह-इ-हसरत सामने आ गई...
उनके चेहरे की रंगत बदली अचानक, नफरत सामने आ गई,
बस खामोश रहकर सब देखते रहे, जब हम दुनिया की रंगत,
सजने लगी फिर यारों की महफ़िल,चाह-इ-हसरत सामने आ गई...
No comments:
Post a Comment