Tuesday, 14 June 2011

कैसी है यह जिन्दगी--

कभी खट्टी है, तो कभी मीठी होती है यह जिन्दगी,
कभी बच्चे की किलकारी सी होती है यह जिन्दगी,
और कभी पुरानी बुढ़िया सी रोती है यह जिन्दगी,
कभी पतझड़ सी, कभी बसंत सी होती है यह जिन्दगी,
कभी जागी तो कभी कुम्भकर्ण सी सोती है यह जिन्दगी,
कभी हकीकत, तो कभी ख्वाबों को पिरोती है यह जिन्दगी,
कभी खेलती रहती, कभी थकी सी होती है यह जिन्दगी,
और कभी अनगिनत यादों के बोझ को भी ढोती है यह जिन्दगी
कभी मेरे करीब है, कभी मुझसे दूर होती है यह जिन्दगी,
कभी तारीखों के पन्नों में दबी इतिहास होती है यह जिन्दगी,
कभी मासूम सी, और कभी चालबाज़ सी होती है यह जिन्दगी,
कभी मन-वकील के मन सी, अशांत भटकी होती है यह जिन्दगी,
कभी तारों की छाँव, तो कभी सूरज की तपिश होती है यह जिन्दगी,
और कभी भीड़ में बैठकर भी, अकेली सी रोती है यह जिन्दगी,
कभी हाथों की लकीरों में, ना जाने कहाँ भटकी होती है यह जिन्दगी,
कभी तकरीरों को सुनती, कभी लतीफों की तरह होती है यह जिन्दगी,
कभी विधवा का क्रंदन,कभी किसी देव का वंदन होती है यह जिन्दगी,
कभी आमों की बयार, कभी साँपों से घिरा चन्दन होती है यह जिन्दगी,
कभी हास-परिहास, और कभी युगों से उदास होती है यह जिन्दगी,
कभी रूठी प्रीतम की तरह, कभी प्रेयसी से पास होती है यह जिन्दगी,
अज़ब रूप धरे रहती , एक अनबूझा सवाल सी होती है यह जिन्दगी,
कभी उलझन बन डूबी रहती, कभी बेमिसाल सी होती है यह जिन्दगी,
मन-वकील अब तो निकल पड़ किसी राह पर,हाथों में लेकर यह जिन्दगी,
बीत जायेगी बिन कहे, और कभी पल-पल सी रुक ना जाए यह जिन्दगी.......

No comments:

Post a Comment