Wednesday, 15 June 2011

मेरा वर्तमान

वर्तमान की चिंता करता देखा मैंने भूतकाल,
और भविष्य के पीछे दौड़ता रहता है वर्तमान,
अवशेषों में खुशियाँ ढूंढें, भुलाकर आज की चाल, 
इन रेत के घरौंदों में ढह कर रह जाता है वर्तमान,
बीते सपने, बीते हुए पल,धीमी सी हुई वो ताल,
तीव्रता को थामे हाथों में, दौड़ता रहता है वर्तमान,
आने वाले कल की चिंता, बीते कल का करे मलाल,
समक्ष पड़े दायित्व-क्रम को भूलता रहता है वर्तमान,
मेरे बंधू या मेरे शत्रु , सोच सोच बस यही होता बेहाल,
आवसादों को मन के भीतर ढोता रहता है वर्तमान,
=======मन-वकील

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