Thursday, 16 June 2011

फितरत-2

" हाल छुपाकर रखा करों दोस्त, सीने में कही इस तरह,
लोग ना जान पाए तेरे दर्द का समंदर, कुछ इस तरह,
जुबाँ का काम लो मेरे दोस्त, अपनी आँखों से इस तरह,
अरे, अल्फाज़ निकले बस बहकर कुछ आंसुओं की तरह "

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