Thursday, 16 June 2011

विद्रोही हूँ

विद्रोही हूँ हनन कर दो,
आज मेरा दमन कर दो,
बुझा दो अग्नि क्रांति की,
दिखाकर छवि शान्ति की,
झूठी आशा को नमन कर दो
आज मेरा दमन कर दो,
न बहे प्रगति की कोई गंगा,
रहने को हुआ है मन नंगा,
उग्र विचारों का हवन कर दो,
आज मेरा दमन कर दो,
उदित न होने पाए कोई सूरज,
न तैरे शिक्षा के नवीन जलज,
गतिज नए युग का शमन कर दो,
आज मेरा दमन कर दो,
मुखों पर जड़ दो कई कई ताले,
न कोई नए ग्रन्थ अब रच डाले,
तोड़ो लेखनी,पत्र सब भस्म कर दो,
आज मेरा दमन कर दो,
हो जनता, परिवर्तन सुख से विहीन,
मिलें रास्ते में, पुनः पुनः मन-मलिन ,
चेतन से जड़ हो सभी, ऐसा जतन कर दो,
आज मेरा दमन कर दो,
नसों में बहता यह रक्त अब श्वेत हो जाये ,
बंज़र मरुभूमि , सब ये हरे खेत हो जाये,
उजड़ जाए जंगल, ऐसा कुछ प्रयत्न कर दो,
आज मेरा दमन कर दो,
मुझे अब दे दो विष मसीह वाला वो प्याला,
न देखे अब मन-वकील सुबह का नया उजाला,
मृत्यु भी मिले,पीडान्तक, ऐसा मरण कर दो,
आज मेरा दमन कर दो,
विद्रोही हूँ हनन कर दो,
आज मेरा दमन कर दो,

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