आँखों में बस भूख थी उसके,
और तन में चिथड़ों के वसन,
दोनों हाथ फैलाएं सबके आगे,
सड़क के किनारे वो था यूँ खड़ा ,
मैं जो निकला उससे बचकर,
जब अपनी रहा था मैं टटोल,
एक सिक्के को मुठी में थामे,
मन में मेरे विचार यह आ पड़ा..
क्या दूं ? यह सिक्का इसके मैं,
या फिर इसे जब में ही रहने दूँ ,
फिर अचानक उसकी और देखा,
और वो मुझे देख कर यूँ हंस पड़ा,
मैं विचारों से आ गिरा अचानक,
इस चेतना की पथरीली धरती पर,
उसकी मुस्कान ने मुझसे जैसे पूछा,
बता, मैं भिखारी या तू ? कौन है बड़ा ?
और तन में चिथड़ों के वसन,
दोनों हाथ फैलाएं सबके आगे,
सड़क के किनारे वो था यूँ खड़ा ,
मैं जो निकला उससे बचकर,
जब अपनी रहा था मैं टटोल,
एक सिक्के को मुठी में थामे,
मन में मेरे विचार यह आ पड़ा..
क्या दूं ? यह सिक्का इसके मैं,
या फिर इसे जब में ही रहने दूँ ,
फिर अचानक उसकी और देखा,
और वो मुझे देख कर यूँ हंस पड़ा,
मैं विचारों से आ गिरा अचानक,
इस चेतना की पथरीली धरती पर,
उसकी मुस्कान ने मुझसे जैसे पूछा,
बता, मैं भिखारी या तू ? कौन है बड़ा ?
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