अरे चन्द सिक्कों में बिकते ज़मीर को देखा,
बिन कपड़ों के बिकती हुस्न की तस्वीर को देखा,
मुल्क में निजाम है यारों अब करप्शन के जोर पर,
तभी संसद में बैठे शातिरों की तक़रीर को देखा,
सियासतदानो के हवाई सफ़र तो होते हर रोज़,
अब तो उनके चमचों की बनती ताबीर को देखा,
खेल के मैदानों में अब खेल कोई और खेलता,
किसी कोने में रोती खिलाडी की तकदीर को देखा,
कभी थानों में बिकती है कानून की अस्मत हर रात
अब तो कचहरी में लुटते इन्साफ बेनजीर को देखा
मत गिरा नज़रों से अपनी मेरी ईमानदारी को ऐसे,
बेशक तुने बईमानी के बढती हुई शमशीर को देखा,
===मन वकील
बिन कपड़ों के बिकती हुस्न की तस्वीर को देखा,
मुल्क में निजाम है यारों अब करप्शन के जोर पर,
तभी संसद में बैठे शातिरों की तक़रीर को देखा,
सियासतदानो के हवाई सफ़र तो होते हर रोज़,
अब तो उनके चमचों की बनती ताबीर को देखा,
खेल के मैदानों में अब खेल कोई और खेलता,
किसी कोने में रोती खिलाडी की तकदीर को देखा,
कभी थानों में बिकती है कानून की अस्मत हर रात
अब तो कचहरी में लुटते इन्साफ बेनजीर को देखा
मत गिरा नज़रों से अपनी मेरी ईमानदारी को ऐसे,
बेशक तुने बईमानी के बढती हुई शमशीर को देखा,
===मन वकील
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