विद्रोह की पीड़ा
विद्रोह की पीड़ा, कभी देखी है आपने,
यदि नहीं, तो गौर करना अवश्य तुम,
किसी आतंकवादी की माँ के चेहरे पर,
स्याह चिंता के घेरों कैसे आन बसी हुई,
उस माँ की आँखों के लाल सुर्ख कोनों में,
जहाँ अब अश्रु सूख गए है बार-२ बहकर,
विद्रोह की पीड़ा, कभी देखी है आपने,
यदि नहीं, तो गौर करना अवश्य तुम,
किसी सिपाही की विधवा के माथे पर,
जहाँ अब बिंदिया की जगह एक चिन्ह,
जो उसके घिसने पर भी नहीं मिटता अब,
और जिसके बसंत अब पतझड़ बन गये,
विद्रोह की पीड़ा, कभी देखी है आपने,
यदि नहीं, तो गौर करना अवश्य तुम,
उस पिता के खाली पड़े बूढ़े चेहरे पर,
जहाँ अब नाउम्मीदी ने घर कर लिया,
जिसकी लकड़ी की लाठी बार बार पूछती,
बता मुझे, मैं भली थी या तेरा अपना बीज,
विद्रोह की पीड़ा, कभी देखी है आपने,
यदि नहीं, तो गौर करना अवश्य तुम,
कभी झाँक लेना शहर के अनाथाश्रम में,
जहाँ कई मासूमों की किस्मत में पुत गई,
माँ बाप की अचानक हुई मौत की कालिख,
शहर में फटे बम की आग की तीखी तपिश से,
===मन वकील
विद्रोह की पीड़ा, कभी देखी है आपने,
यदि नहीं, तो गौर करना अवश्य तुम,
किसी आतंकवादी की माँ के चेहरे पर,
स्याह चिंता के घेरों कैसे आन बसी हुई,
उस माँ की आँखों के लाल सुर्ख कोनों में,
जहाँ अब अश्रु सूख गए है बार-२ बहकर,
विद्रोह की पीड़ा, कभी देखी है आपने,
यदि नहीं, तो गौर करना अवश्य तुम,
किसी सिपाही की विधवा के माथे पर,
जहाँ अब बिंदिया की जगह एक चिन्ह,
जो उसके घिसने पर भी नहीं मिटता अब,
और जिसके बसंत अब पतझड़ बन गये,
विद्रोह की पीड़ा, कभी देखी है आपने,
यदि नहीं, तो गौर करना अवश्य तुम,
उस पिता के खाली पड़े बूढ़े चेहरे पर,
जहाँ अब नाउम्मीदी ने घर कर लिया,
जिसकी लकड़ी की लाठी बार बार पूछती,
बता मुझे, मैं भली थी या तेरा अपना बीज,
विद्रोह की पीड़ा, कभी देखी है आपने,
यदि नहीं, तो गौर करना अवश्य तुम,
कभी झाँक लेना शहर के अनाथाश्रम में,
जहाँ कई मासूमों की किस्मत में पुत गई,
माँ बाप की अचानक हुई मौत की कालिख,
शहर में फटे बम की आग की तीखी तपिश से,
===मन वकील
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