घिरघिर आये बदरा अब मोरे अंगना, रिमझिम रिमझिम बरसे फुहार,
राग दोष सबहु मिटे ब्याकुल मन के, जबहु पड़े तन पर जल की बौछार,
कडक कड़क बिजुरिया गरजे,घन झपट झपट भागे जैसे कोई अश्व सवार,
खिले पुष्प पादप भरे बहु रंग, पात पात हिलाए पीपल ज्यो गाये मल्हार,
झरत झरत बूंदें धरा पर अमृत सी, बाल बाल झूमे इत उत मुख रहे पुकार,
जन जन भये हर्षित हो तापमुक्त,निरत करे अपनौ आंगन देयो सुधि बिसार,
सूरज अब कही जाए छिपे श्याम पट महू,जल बूंदें करत भंग तासु अहंकार,
जीवन भरे रंग चहुदिश,खग चहके हर्ष ध्वनि सह,सावन करे अबहु मनुहार
राग दोष सबहु मिटे ब्याकुल मन के, जबहु पड़े तन पर जल की बौछार,
कडक कड़क बिजुरिया गरजे,घन झपट झपट भागे जैसे कोई अश्व सवार,
खिले पुष्प पादप भरे बहु रंग, पात पात हिलाए पीपल ज्यो गाये मल्हार,
झरत झरत बूंदें धरा पर अमृत सी, बाल बाल झूमे इत उत मुख रहे पुकार,
जन जन भये हर्षित हो तापमुक्त,निरत करे अपनौ आंगन देयो सुधि बिसार,
सूरज अब कही जाए छिपे श्याम पट महू,जल बूंदें करत भंग तासु अहंकार,
जीवन भरे रंग चहुदिश,खग चहके हर्ष ध्वनि सह,सावन करे अबहु मनुहार
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